चाणक्य कहते है ये 4 चीजें हैं सुखी घर की निशानी, इन्हें अपनाने से दूर होंगी परेशानियां.

क्षान्ति तुल्यं तपो नास्ति सन्तोषान्न सुखं परम् । नास्ति तृष्णा समो व्याधिः न च धर्मो दयापरः ॥

शांति     चाणक्य कहते हैं कि समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, शांति हर समस्या का समाधान है।  

चाणक्य ने इस श्लोक में कहा है कि शांति में कोई बड़ी तपस्या नहीं होती  है।  आजकल लोगों के पास सभी भौतिक सुख हैं लेकिन उनके पास मन की शांति नहीं  है। 

जिसका मन अशांत है, वह सभी सुख-सुविधाओं के बावजूद कभी सुखी नहीं हो सकता।  

मन के वश में होने पर ही शांति मिलती है। 

संतुष्टि   चाणक्य कहते हैं कि मानव जीवन में संतोष ही उसका सबसे बड़ा धन और शक्ति है।  

ऐसा कहा जाता है कि एक संतुष्ट जीवन एक सफल जीवन से बेहतर है, क्योंकि सफलता हमेशा दूसरों द्वारा मापी जाती है,  

जबकि संतोष अपने मन और दिल से महसूस किया जाता है।  संतोष के लिए हमारी इंद्रियों पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है।

तीव्र इच्छा   चाणक्य कहते हैं कि तृष्णा एक ऐसी बीमारी की तरह है, जिसका इलाज समय पर न किया जाए तो जीवन भर परेशान करना पड़ता है।  

किसी भी चीज की लालसा इंसान को गलत रास्ते पर ले जाती है, जहां से सारी खुशियां छीन ली जाती हैं। 

लालच में व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है।  जिसने इस पर विजय प्राप्त कर ली है, उसका जीवन स्वर्ग से भी बड़ा है।

दया   करुणा मनुष्य को कुशल बनाती है।  दया की भावना व्यक्ति को बुराई करने से रोकती है। 

ऐसे व्यक्ति पाप के भागी नहीं बनते, उनके मन में पाप की आत्मा नहीं उठती।