आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में धन को लेकर एक महत्वपूर्ण नीति बताई है।

हर व्यक्ति के जीवन में धन का विशेष महत्व होता है।

पैसों से वह अपनी जरूरतों के साथ शौक भी पूरे कर सकता है।

लेकिन व्यक्ति में जब पैसों का घमंड आ जाए तो वह अर्श से फर्श तक भी ला सकता है।

लेकिन धन कमाने के चक्कर में अगर तीन चीजें खो जाएं तो उन्हें दोबारा नहीं कमाया मुश्किल होता है।

स्वाभिमान से व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान होती है। धन गंवाने पर व्यक्ति उसे दोबारा कमा सकता है,

स्वाभिमान से व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान होती है। धन गंवाने पर व्यक्ति उसे दोबारा कमा सकता है,  

अगर आत्मसम्मान के लिए किसी व्यक्ति को पैसों का त्याग करना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए।  

आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों में बताते हैं कि अगर आपने कोई सपना देखा है तो उसे पूरा करने के सज्ज होने पड़ेगा।

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज के दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितने उनके अपने समय में थी।