असी आदते व्यक्ति की मेहनत को कर देती है बर्बाद, छिन जाता है सुख-चैन, जाने सबकुस 

आचार्य चाणक्य के सिद्धांत हमें हर कदम पर प्रेरित करते हैं।  यह बताता है कि कैसे एक सुखी और अच्छा जीवन जीना है। 

चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति नैतिकता में वर्णित बातों का पालन करता है, वह आर्थिक,  

शारीरिक और मानसिक रूप से सफल जीवन जीता है।  चाणक्य के पास प्रगति, वैवाहिक जीवन,  

धन आदि से संबंधित समस्याओं का अनूठा समाधान है।  मानवीय गुण उसे कुशल बनाते हैं।   

समाज में मान सम्मान लाता है।  सफलता की राह तो दिखाते हैं, लेकिन इंसान की एक गलत आदत उसकी सारी  

मेहनत बर्बाद कर देती है।  चाणक्य ने भी एक ऐसे दोष का उल्लेख किया है जो मनुष्य के सौ गुणों से भी बड़ा है। 

चाणक्य नीति के 13वें अध्याय के 15वें श्लोक में इस दोष का उल्लेख मिलता है।  चाणक्य ने कहा है 

कि जिसका मन स्थिर नहीं है वह कभी सुखी नहीं हो सकता।  व्यक्ति कितना भी धनी क्यों न हो,  

लेकिन इस एक दोष के कारण उसका जीवन परेशानियों से घिरा रहता है।  

जिस व्यक्ति का मन नियंत्रण में नहीं होता है, उसका अपना काम करने का मन नहीं करता है।  

चाणक्य ने एक श्लोक में कहा है कि जो अपने मन पर नियंत्रण नहीं रखता, उसे न तो लोगों में सुख मिलता है  

और न ही जंगल में।  इसलिए कहा जाता है कि जीत मन से होती है, हारने वाले की हार मन से होती है।